लुमेनिस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड बनाम महाराष्ट्र राज्य और अन्य

यश जैनCase SummaryLeave a Comment

लुमेनिस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड बनाम महाराष्ट्र राज्य और अन्य

लुमेनिस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड बनाम महाराष्ट्र राज्य और अन्य
बॉम्बे उच्च न्यायालय
आपराधिक आवेदन क्रमांक 1354/2015
न्यायाधीश रंजीत मोरे और न्यायाधीश वी.एल अच्लिया के समक्ष
निर्णय दिनांक: 08 जनवरी 2016

मामले की प्रासंगिकता: क्या मैत्रीपूर्ण समझौते को प्राथमिकी (जिसकी जाँच लंबित हो) खारिज करने के लिए आधार बनाया जा सकता है ?

सम्मिलित विधि और प्रावधान

  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (धारा 43(घ), 66)
  • दंड प्रक्रिया संहिता, 1973  (धारा 482)

मामले के प्रासंगिक तथ्य

  • साइबर पुलिस थाना, बीकेसी मुंबई के साथ पंजीकृत प्राथमिकी को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 482 के अंतर्गत खारिज करने के लिए आवेदन दायर किया गया।
  • यह प्राथमिकी आईटी एक्ट की धारा 43(घ) और 66 के अधीन अपराधों के लिए आवेदककर्ता के विरूद्ध पंजीकृत की गई थी ।
  • न्यायालय के समक्ष मूल शिकायतकर्ता ने एक शपथ पत्र दायर किया यह कहते हुए कि उसके और आवेदक के बीच का विवाद सुलझ गया है |
  • उसे आपराधिक अभियोग को जारी रखने में कोई दिलचस्पी नहीं है और एफ आई आर के रद्द होने में कोई आपत्ति नहीं है।
  • शिकायतकर्ता न्यायालय के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित था यह साबित करने के लिए कि कोई दबाव या असम्यक असर नहीं था।

अधिवक्ताओं द्वारा प्रमुख तर्क

संबंधित पक्षकारों के काउंसिल ने यह प्रस्तुत किया कि जांच की लंबमानता के दौरान, पक्षकारों ने आपसी समझौते से अपनी समस्याओं को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझा लिया है | एफ आई आर को रद्द करने की अर्जी उत्तर दाता क्रमांक 2 की सम्मति से दायर किया गई है।

न्याय पीठ की राय

चूंकि आरोप व्यक्तिगत प्रकृति के  है और समाज को प्रभावित नहीं करते हैं इसलिए न्याय पीठ का विचार था कि एफआईआर को रद्द करने में कोई बाधा नहीं है।

अंतिम निर्णय

  • आवेदक टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल को ₹25000 का भुगतान करेगा और उत्तरदाता क्रमांक 2 पुलिस कल्याण कोष को ₹25000 का भुगतान करेगा।
  • इस रद्द करने के निर्णय को प्रभावी बनाने के लिए, उपरोक्त भुगतान की रसीद चार सप्ताह के अंदर न्यायालय के रिकॉर्ड के समक्ष रखी जाना चाहिए |
  • निर्धारित समय के भीतर इसका उत्पादन करने में विफल होने पर एफ आई आर को रद्द करने वाली अर्जी स्वचालित रूप से खारिज हो जाएगी।

इस केस के सारांश को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें  | To read this case summary in English, click here.

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